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December 26, 2016

Go Cashless Go Digital

  webmaster       December 26, 2016

डिजिटल वित्तीय समावेश का सन्दर्भ समाज की मुख्य धारा से बाहर एवं अधिकारविहीन लोगों तक डिजिटल पहुंच तथा औपचारिक वित्तीय सेवाओं के उपयोग का अवसर प्रदान करना है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए शुरु की गई सेवाओं को डिजिटल फाइनेंशियल सर्विसेस (DFS) के रूप में जाना जाता है। इन्हें ग्राहकों की आवश्यकता के अनुसार डिज़ाइन किया गया है और ज़िम्मेदारी से उस उचित कीमत पर उपलब्ध कराया जाता है जो ग्राहकों और प्रदानकर्ताओं दोनों के लिए वहनीय हो। ऐसी किसी भी डिजिटल फाइनेंशियल सर्विस के तीन मुख्य भाग होते हैं: आदान-प्रदान का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म, खुदरा एजेंट्स, तथा प्लेटफॉर्म के माध्यम से आमतौर पर मोबाइल फोन जैसे उपकरण का ग्राहकों व एजेंट्स द्वारा उपयोग।
यह एक माध्यम है जिससे डिजिटल चैनल्स अनबैंक्ड आबादी तक फाइनेंशिअल सेवाएं तेजी से पहुंचा रहे हैं। बैंक, लघुफाइनेंस संस्थाएं, मोबाइल ऑपरेटर्स, एवं लघु एजेंट्स नेटवर्क के साथ अन्य सेवा प्रदाता मोबाइल फोन्स, विक्रय बिन्दु(पाईंट-ऑफ-सेल) उपकरण की उपलब्धता का फायदा उठाते हुए व्यापक पैमाने पर,सुविधाजनक तरीके से बुनियादी वित्तीय सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।


 
डिजिटल फाइनेंशियल सर्विसेस निम्नलिखित हैं:
1. कार्ड्स
2. USSD-यूएसएसडी
3. AEPS-एईपीएस
4. UPI-यूपीआइ
5. वॉलेट
कार्ड्स
कार्ड्स क्या हैं?
ये आमतौर पर बैंक द्वारा जारी किए जाते हैं तथा इन्हें जारी करने, कार्डधारक द्वारा उपयोग व भुगतान के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। कार्ड तीन प्रकार के होते हैं: डेबिट कार्ड, क्रेडित कार्ड तथा प्रीपेड कार्ड।
1. प्रीपेड कार्ड्स: ये ग्राहक बैंक अकाउंट से प्री-लोडेड होते हैं और जो सीमित लेनदेन के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं। इन्हें मोबाइल रीचार्ज की तरह रीचार्ज किया जा सकता है। उपयोग करने के लिए सुरक्षित।
2. डेबिट कार्ड्स: इसे खाताधारी बैंक द्वारा जारी किया जाता है जो बैंक अकाउंट से लिंक किया हुआ होता है। डेबिट कार्ड खाताधारकों (करंट/सेविंग/ओवरड्राफ्ट) को जारी किए जाते हैं तथा किये गये कोई भी खर्च उपयोगकर्ता के खाते से तुरंत काट लिये जाते हैं। उपयोगकर्ता इस कार्ड का उपयोग अपने बैंक अकाउंट में मौज़ूद सीमा तक नगद निकालने के लिए कर सकता है। इसका उपयोग एक व्यक्ति से दूसरे को घरेलू फंड ट्रांस्फर के लिए भी किया जा सकता है।
3. क्रेडिट कार्ड्स: इन्हें बैंक्स/रिजर्व बैंक अधिकृत अन्य कम्पनियों द्वारा जारी किया जाता है। इन्हें घरेलू या अंतर्राष्ट्रीय (यदि अंतर्राष्ट्रीय उपयोग के लिए सक्षम बनाया गया हो) तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। डेबिट कार्ड से अलग, क्रेडिट कार्ड्स के मामले में कोई ग्राहक अपने बैंक खाते में मौज़ूद धनराशि की मात्रा से अधिक धन भी निकाल सकता है। लेकिन हर क्रेडिट कार्ड के लिए निर्धारित सीमा तक अतिरिक्त धन निकाला जा सकता है।
लाभ
1. अपने कार्ड का उपयोग कहीं भी खरीदारी के लिए कर सकते है।
2. दुकानों, एटीएम(ATM), वॉलेट्स, माइक्रोएटीएम(ATM),ऑनलाइन खरीदारी करने में।
3. डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड्स, दोनों का उपयोग एटीएम(ATM) से नगद निकालने, पॉइंट-ऑफ़-सेल (POS) पर सामान व सेवाओं की खरीद तथा ऑनलाइन खरीद के लिए किया जा सकता है।
4. सभी प्रकार के यूटिलिटी बिलों के भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
5. उपभोक्ता इनसे टिकट (एअरलाइन/रेलवे/बस) खरीद सकते हैं, होटल में बुकिंग कर सकते हैं और रेस्ट्राँ में भुगतान कर सकते हैं।
6. उपयोगकर्ता ऐसे किसी भी स्थान पर किसी भी सेवा के भुगतान के लिए कार्ड का उपयोग कर सकते हैं जहां कार्ड रीडर/ POS मशीन हो।
कार्ड कैसे प्राप्त किया जा सकता है
उपभोक्ता डेबिट/रुपे/क्रेडिट कार्ड्स के लिए सभी सार्वजनिक व निजी बैंक्स में आवेदन दे सकते हैं।
• नागरिक अपनी बैंक शाखा में आवेदन देकर डेबिट कार्ड प्राप्त कर सकते हैं।
• नागरिक अपने डेबिट कार्ड्स रुपे कार्ड से बदल भी सकते हैं।
• नागरिक अपने डेबिट कार्ड्स रुपे कार्ड से बदल भी सकते हैं।
• सरकार के आदेश के अनुसार, सभी जन धन योजना खाता धारकों को रुपे (RuPay) कार्ड जारी किए जाएंगे।
USSD (अन्स्ट्रक्चर्ड सप्लिमेंटरी सर्विस डाटा)
USSD क्या है?
USSD का अर्थ है अन्स्ट्रक्चर्ड सप्लिमेंटरी सर्विस डाटा। यह एक सेवा है जिसका उद्देश्य बैंकिंग को देश के हर आम नागरिक तक ले जाना है। यह सेवा प्रत्येक ग्राहक को टेलीकॉम सेवा प्रदाता, मोबाइल सेट निर्माता या क्षेत्र से प्रभावित हुए बिना एक ही नम्बर से बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच प्रदान करती है। यह नेशनल यूनिफाइड USSD प्लेटफ़ॉर्म (NUUP) के ज़रिए एक शॉर्ट कोड *99# पर प्रदान की जाती है। इसे प्रतिदिन प्रति ग्राहक रु.5000 भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
अन्स्ट्रक्चर्ड सप्लिमेंटरी सर्विस डाटा के लिए उपभोक्ता के पास निम्न चीज़े होनी चाहिए
• किसी बैंक में खाता
• GSM नेटवर्क पर कोई भी मोबाइल फोन
• उपभोक्ता खाते का बैंक में रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर होना चाहिए।
अन्स्ट्रक्चर्ड सप्लिमेंटरी सर्विस डाटा का उपयोग करने के लिए उपभोक्ता
1. अपनी बैंक शाखा जाएं और मोबाइल नम्बर अपने बैंक खाते से लिंक करवाएं (यहATM पर या ऑनलाइन भी हो सकता है)
2. आपको मोबाइल मनी आइडेंटिफायर (MMID) तथा मोबाइल पिन (MPIN) प्राप्त होगा।
3. MPIN याद रखें।
USSD के क्या लाभ हैं?
USSD के लाभ वित्तीय व गैर वित्तीय क्षेत्र में है
ग़ैर-वित्तीय सेवाएं
• बैलेंस की पूछताछ – उपयोगकर्ता मोबाइल नम्बर से लिंक बैंक खाते में उपलब्ध बैलेंस चेक कर सकते हैं।
• मिनी स्टेटमेंट – उपयोगकर्ता मोबाइल नम्बर से लिंक बैंक खाते का मिनी स्टेटमेंट प्राप्त कर सकते हैं।
• MMID *(Mobile Money Identifier) की जानकारी–उपयोगकर्ता बैंक द्वारा मोबाइल बैंकिंग रजिस्ट्रेशन के दौरान दिये गये MMID जान सकते हैं।
• M-PIN बनाना/बदलना –उपयोगकर्ता M-PIN (Mobile PIN)क्रियेट/बदल सकते हैं जो कि पासवर्ड की तरह होता है और वित्तीय लेनदेन में अधिकृत होने के लिए प्रयुक्त होता है।
वित्तीय सेवाएं:
• मोबाइल नम्बर एवं MMID के उपयोग से फंड ट्रांस्फर –उपयोगकर्ता हितग्राही के मोबाइल नम्बर एवं MMID के उपयोग से फंड्स ट्रांस्फर कर सकते हैं।
• IFSC एवं खाता संख्या के उपयोग से फंड ट्रांस्फर – उपयोगकर्ता हितग्राही के IFSC कोड एवं खाता संख्या से फंड स्थानांतरित कर सकते हैं।
• अधिक निर्देशों के लिए आप अपने सम्बन्धित बैंक की वेबसाइट से जानकारी ली जा सकती है।
AEPS (आधार एनेबल्ड पेमेंट सर्विस)
AEPS क्या है?
AEPS का अर्थ है आधार एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम। यह एक भुगतान सेवा है जो बैंक ग्राहक को अपने आधारकार्ड संबंधी पहचान से सम्बन्धित आधार सक्रिय बैंक खाते तक पहुंच बनाने एवं सामान्य बैंकिंग लेनदेन की सुविधा प्रदान करती है। यह बैंकिंग कॉरस्पॉंडेंट (BC) की सहायता से PoS (MicroATM) पर बैंक-से-बैंक लेनदेन की अनुमति देती है। उपयोगकर्ता को बैंक में या BC की सहायता से अपने अकाउंट के लिए आधार नम्बर देना होता है। उपयोगकर्ता बगैर PIN या पासवर्ड के किसी भी AEPS बिन्दु पर मनचाही संख्या में लेनदेन कर सकता है।
किसी ग्राहक को AEPS लेनदेन करने के लिए निम्नलिखित होना आवश्यक है:-
• IIN (ग्राहक संबंधित बैंक की पहचान)
• आधार नम्बर
• नाम दर्ज़ करते समय लिए गए उंगलियों के निशान
AEPS से आप निम्नलिखित प्रकार के लेनदेन कर सकते हैं:-
• बैलेंस पूछताछ
• नगद निकासी
• नगद जमा करना
• आधार से आधार फंड्स का स्थानांतरण
• AEPS से उचित मूल्य की दुकानों पर खरीदारी
AEPS के लाभ
• आधार नम्बर एवम उंगलियों के निशान का उपयोग कर लाभ लेने के लिए उपयोग में आसान, सुरक्षित भुगतान प्लेटफॉर्म।
• किसी व्यक्ति की जनसांख्यिकीय तथा बायोमीट्रिक/आंख की पुतली की जानकारी पर आधारित होने से किसी भी धोखाधड़ी या अनुचित गतिविधि को रोकता है।
• NREGA, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, दिव्यांग वृद्ध आयु पेंशन आदि जैसी केन्द्रीय या राज्य सरकारों के निकायों की सरकारी सुविधाओं के वितरण को आधार द्वारा अधिकृत कर सुविधाजनक बनाता है।
• बैंकों के बीच अंतर-प्रचालन को सुरक्षित रूप से करना सुविधाजनक बनाता है।
• उनके बैंक नेटवर्क की पहुँच से दूर ग्राहकों को वित्तीय सेवाएं विस्तारित करने के लिए बैंकों को सक्षम बनाता है क्योंकि BCs के हितग्राही अधिकतर बैंक विहीन या बैंकों की कम संख्या वाले स्थानों पर होते हैं।
• वर्तमान में लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाता है।
• बैंक खाता नम्बर याद रखने की कोई आवश्यकता नहीं।
• बायोमीट्रिक उपकरण रखने वाले उपभोक्ता कम्प्यूटर, एंड्रॉइड फोन/टैब्लेट्स का उपयोग कर घर बैठे लेनदेन कर सकते हैं। बायोमीट्रिक उपकरण में कुछ इनबिल्ट टैब्लेट्स उपलब्ध होते हैं जिनका उपयोग लेनदेन के लिए किया जा सकता है।
UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटर्फेस)
UPI क्या है?
UPI का अर्थ है यूनिफाइड पेमेंट्स इंटर्फेस। यह उपयोगकर्ता के स्मार्टफोन से तुरंत इलेक्ट्रॉनिक भुगतान की प्रणाली है। यह इमीजिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) का उन्नत संस्करण है जो बैंक खातों के बीच धनराशि ट्रांस्फर करने के लिए उपयोग में लाई जाती थी।
IMPS की तरह UPI चौबीसों घंटे फंड्स स्थानांतरित करने की सेवा को सुविधाजनक बनाती है।
• यह उसी तरह उपयोगकर्ता की पहचान को प्रमाणित करती है जिस तरह अलग कार्ड का उपयोग करने के बजाय फोन के ज़रिए क्रेडिट कार्ड का उपयोग करने में होता है।
• यह 24×7, 365 दिन कार्य करती है।
विशेषताएं एवं लाभ क्या हैं?
• UPI उपयोगकर्ता के नाम, बैंक खाता नम्बर, IFSC कोड या बैंक शाखा का विवरण साझा करने की आवश्यकता को समाप्त करती है।
• UPI डेबिट कार्ड्स जैसे भौतिक साधनों के उपयोग को भी समाप्त करती है।
• नेट बैंकिंग जैसी बहु-चरण प्रक्रियाओं के उपयोग की आवश्यकता नहीं, जिनमें असुरक्षित फ्रेमवर्क्स से फिशिंग का खतरा होता है।
• बहुत आसान ऐप्लिकेशन है जिसका इस्तेमाल कोई भी कर सकता है।
• त्वरित एवं सुरक्षित प्रमाणीकरण कहीं भी हो सकता है।
• पूर्णतः कैशरहित समाज का मार्ग प्रशस्त करती है।
• इनवॉइस की तरह धनराशि के अनुरोध के लिए उपयोग किया जा सकता है।
• ग्राहक यूटिलिटी बिलों एवं स्कूल फीस के ऑनलाइन भुगतान के लिए भी UPI का इस्तेमाल कर सकते हैं।
ई-वॉलेट
ई-वॉलेट क्या है?
E-वॉलेट इलेक्ट्रॉनिक वॉलेट को दर्शाता है। यह एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक कार्ड होता है जिसका उपयोग कम्प्यूटर या स्मार्ट्फोन के ज़रिए ऑनलाइन लेनदेन के लिए किया जाता है। ई-वॉलेट की उपयोगिता क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तरह ही है। भुगतान करने के लिए ई-वॉलेट को व्यक्ति के बैंक खाते के साथ लिंक करने की आवश्यकता होती है। ई-वॉलेट का मुख्य उद्देश्य है कागज़ रहित धनराशि स्थानांतरण को अधिक आसान बनाना।
यह कैसे कार्य करता है?
ई-वॉलेट के मुख्य रूप से दो भाग होते हैं, सॉफ़्टवेअर एवं जानकारी। सॉफ़्टवेअर भाग व्यक्तिगत जानकारी स्टोर करता है तथा डेटा सुरक्षा व एंक्रिप्शन देता है जबकि जानकारी का भाग उपयोगकर्ता द्वारा प्रदत्त विवरणों का डेटाबेस होता है जिसमें उनका नाम, डाक पता, भुगतान विधि, भुगतान की जाने वाली राशि, क्रेडित या डेबिट कार्ड का विवरण आदि होते हैं।
ई-वॉलेट का उपयोग करने के लिए उपभोक्ता के पास
• 1. बैंक अकाउंट
• 2. स्मार्ट फोन
• 3. 2G/3G/4G कनेक्शन
• 4. एक मुफ्त वॉलेट ऐप होना चाहिए |
डिजिटल और लेस-कैशइकोनॉमी को प्रोत्साहन के लिए पैकेज
पेट्रोलियम कंपनियों के द्वारा प्रोत्साहन
डिजिटल तरीके से पेमेंट करने पर सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियां पेट्रोल या डीजल की बिक्री पर ग्राहकों को 0.75 प्रतिशत की रियायत देंगी।
ऐसे पेट्रोल पंपों पर हर रोज 4.5 करोड़ लोग पेट्रोल या डीजल भरवाते हैं, जिन्हें इस स्कीम का फायदा मिल सकता है। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन 1800 करोड़ का पेट्रोल/डीजल लोगों को बेचा जाता है। इसमें से 20 प्रतिशत का पेमेंट डिजिटल तरीके से किया जाता था। नवंबर के महीने में ये बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 360 करोड़ रुपए प्रतिदिन का कैश-ट्रांजेक्शन अब डिजिटल माध्यमों से होने लगा है।
बैंकों को आर्थिक मदद
  • ग्रामीण इलाकों में डिजिटल पेमेंट को आसान बनाने के लिए सरकार नाबार्ड की मदद से बैंकों को आर्थिक मदद देगी। प्रयास है कि 10 हजार से कम आबादी वाले 1 लाख गावों में 2 पीओएस मशीनें अवश्य हों।
  • ये पीओएस मशीनें प्राइमरीकॉपरेटिवसोसायटी/दुग्ध सोसायटी/ कृषि से जुड़ा सामान बेचने वाले डीलरों के पास लगाई जाएंगी ताकि खेती से जुड़ी चीजों के लिए लेन-देन डिजिटल तरीके से हो सके।
  • इस स्कीम का फायदा एक लाख गांवों में रहने वाले किसानों को होगा। इससे 75 करोड़ की कुल आबादी कवर होगी जो गांवों में खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए डिजिटल तरीके से लेन-देन करेगी।
  • बैंकों को रुपे किसान कार्ड जारी करने में सहायता
    नाबार्ड की मदद से सरकार क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और कॉपरेटिव बैंकों को रुपे किसान कार्ड जारी करने में सहायता करेगी। 4 करोड़ 32 लाख किसान क्रेडिट कार्ड रखने वाले धारकों को रुपे किसान कार्ड वितरित किए जाएंगे ताकि वोपीओएस मशीनों/माइक्रोएटीएम या एटीएम के जरिए डिजिटल पेमेंट कर सकें।
    रेलवे के द्वारा डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहन
  • रेलवे के सब-अर्बन रेलवे नेटवर्क में मासिक और सीजनल टिकट के लिए डिजिटल तरीके से पेमेंट करने वालों को 0.5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। ये छूट 1 जनवरी 2017 से खरीदे जाने वाले टिकटों पर मिलेगी।
  • उपनगरीय रेलवे में लगभग 80 लाख यात्री मासिक या सीजनल टिकट ज्यादातर कैश देकर ही खरीदते हैं। ऐसे टिकट के लिए प्रतिवर्ष लगभग 2 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। जब ज्यादा से ज्यादा यात्री डिजिटल पेमेंट की तरफ बढ़ेंगे तो भविष्य में टिकट खरीदने के लिए नकद राशि की मांग 1000 करोड़ रुपए तक कम हो सकती है।
  • रेलवे में ऑनलाइन टिकट बुक कराने वालों को 10 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा मुफ्त दिया जाएगा।
  • प्रतिदिन 14 लाख रेलवे यात्री टिकट खरीदते हैं जिनसे में 58 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन खरीदे जाते हैं। उम्मीद है कि इस कदम के बाद 20 प्रतिशत और यात्री टिकट बुक कराने के लिए डिजिटल पेमेंट की तरफ बढ़ेंगे। ऐसा होने पर प्रतिदिन लगभग 11 लाख रेल यात्री प्रतिदिन दुर्घटना बीमा स्कीम के तहत कवर होंगे।
  • रेल अपनी मान्यता प्राप्त इकाइयों और कोरपोरेशंस द्वारा सशुल्क सेवाएं भी उपलब्ध कराती है जैसे केटरिंग, ठहरने की सुविधा, विश्रामगृह इत्यादि। इन सुविधाओं के लिए डिजिटल तरीके से पेमेंट करने पर 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।
  • जनरल इंश्योरेंसपॉलिसी के समय प्रीमियम में डिस्काउंट
    सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां कस्टमर पोर्टल के जरिए डिजिटल पेमेंट किए जाने पर जनरल इंश्योरेंस पॉलिसी के समय प्रीमियम में 10 प्रतिशत तक का डिस्काउंट या क्रेडिट देंगी। इसके अलावा लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन में नई जीवन बीमा पॉलिसी के प्रीमियम में 8 प्रतिशत का डिस्काउंट या क्रेडिट दिया जाएगा।
    ट्रांजेक्शन फीस या एमडीआर चार्ज
    केंद्र सरकार के विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान ये सुनिश्चित करेंगे कि डिजिटल पेमेंट करने पर ट्रांजेक्शन फीस या एमडीआर चार्ज ग्राहकों से ना वसूला जाए। ये चार्ज इन विभागों या संस्थानों को खुद वहन करना होगा।
    राज्य सरकारो को भी सलाह दी गई है कि राज्य सरकार के विभाग और संस्थाएं डिजिटल पेमेंट किए जाने पर ग्राहकों से ट्रांजेक्शन फीस या एमडीआर चार्ज ना वसूलें।
    पीओएस टर्मिनल के लिए/ मोबाइल पीओएस किराया
    सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सलाह दी गई है कि वो पीओएस टर्मिनल के लिए/ मोबाइल पीओएस के लिए या फिर माइक्रोएटीएम के लिए 100 रुपए प्रतिमाह से ज्यादा मासिक किराया ना वसूलें। इससे छोटे कारोबारियों को भी डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ने में मदद मिलेगी।
    सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा लगभग 6.5 लाख मशीनें व्यापारियों को दी गई हैं जिन्हें कम किराए का लाभ मिलेगा। किराया कम होने की वजह से और ज्यादा व्यापारी ऐसी मशीनों को लगाने और डिजिटल पेमेंट के लिए प्रोत्साहित होंगे।
    सर्विस चार्ज
    डिजिटल तरीके से 2000 रुपए तक के ट्रांजेक्शन पर अब कोई सर्विस चार्ज नहीं लिया जाएगा और ना ही एमडीआर ( मर्चेंट डिस्काउंट रेट) वसूला जाएगा।
    टोल का भुगतान
    आरएफआईडी कार्ड / फास्ट टैग का उपयोग कर राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा पर टोल का भुगतान के लिए, 10% की छूट वर्ष 2016-17 में उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध हो जाएगा |
    source – सीेएससी इंडिया ।

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