संविदाकर्मियों के लिए उम्मीद की किरण, दशहरे तक मिल सकता है तोहफ़ा

संविदाकर्मियों के लिए उम्मीद की किरण, दशहरे तक मिल सकता है तोहफ़ा

सूबे के अंदर कार्यरत 5 लाख से ज्यादा संविदाकर्मियों के लिए उम्मीद की नई किरण दिख रही है। राज्य सरकार के प्रशासनिक गलियारे से मिल रही खबर के मुताबिक संविदाकर्मियों के नियमितीकरण को लेकर गठित कमेटी अपनी रिपोर्ट एक माह के अंदर सरकार को दे सकती है। अगर ऐसा हुआ तो संविदा कर्मियों को दशहरा पर मिलने वाला सबसे बड़ा तोहफा होगा।

कमिटी को मिला है विस्तार

नीतीश सरकार ने सूबे में कार्यरत संविदाकर्मियों के नियमितीकरण à¤"र उनके लिए अन्य सुविधाà¤"ं के आकलन के लिए 2015 में 8 सदस्य कमेटी का गठन किया था। एके चौधरी की अध्यक्षता में बनी इस कमेटी ने 7 अगस्त को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। लेकिन रिपोर्ट में कई विभागों में कार्यरत संविदाकर्मियों से जुड़े जानकारियां नहीं थी। जिसके बाद राज्य सरकार ने पिछले दिनों कमेटी को फिर से तीन महीने का अवधि विस्तार देते हुए पूरी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।

कई विभागों की कोताही से लटका मामला

सरकार के अंदर खाने से मिल रही खबर के मुताबिक संविदाकर्मियों के भविष्य पर फैसला हो गया रहता अगर कुछ विभागों ने एके चौधरी कमेटी को पूरी तरह से सहयोग किया होता। जानकार बता रहे हैं की उद्योग, कृषि, राजस्व à¤"र स्वास्थ्य विभाग ने अपने यहां कार्यरत संविदाकर्मियों का ब्यौरा कमेटी को उपलब्ध नहीं कराया जिसकी वजह से रिपोर्ट अधूरी रह गई। जबकि राज्य के गृह सचिव ने मई महीने में ही सभी विभागों को ब्यौरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।

अब मुख्यमंत्री ने बरती है सख़्ती

संविदाकर्मियों के भविष्य को लेकर फैसला करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कमेटी को अंतिम रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री इस मामले को लेकर खुद गंभीर है à¤"र उनके रूख को देखते हुए यह माना जा रहा है कि अब तक इस मामले में ढिलाई बरतने वाले विभाग जल्द ही अपने यहां कार्यरत संविदाकर्मियों का ब्यौरा कमेटी को उपलब्ध करा देंगे। सूत्रों के मुताबिक कमेटी एक माह के भीतर ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है। रिपोर्ट आने के बाद सरकार को संविदाकर्मियों के मामले में फैसला लेना होगा।

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